रविवार, 19 अक्तूबर 2008

शराबियों का डाक्टर

घर , परिवार , समाज , देश और दुनिया में भले ही अलहदा वजूहात से निराशा और मायूसी का माहौल छाया हो , लेकिन कुदरत की नाइंसाफ़ी झेल रहे लोगों का हौसला जीने का सबब देता है । हर वक्त अपनी नाकामियों के लिए हालात और किस्मत को कोसने वाले तो अक्सर मिल जाते हैं ,मगर अपने जज़्बे से पथरीले उजाड रेगिस्तान में चमन खिलाने का हुनर चंद ही लोग जानते हैं ।
इरादे नेक हों और दिल में कुछ कर गुज़रने की चाहत हो , तो मुश्किलों को रास्ता बदलना ही पडता है । दोनों आंखॊं से देखने वाले दुनिया में छाये अंधियारे पर बहस करते या फ़िर निराशा में डूबते - उतराते हर तरफ़ नज़र आ जाएंगे । मगर उत्तर प्रदेश में सोनभद्र ज़िले के नंदलाल ने रोशनी की नई इबारत लिख डाली है ।
जन्म से ही दुनिया के रंगों से महरुम नंदलाल नहीं जानता कि सूरज की रोशनी कैसी होती है । लेकिन उसने सबको बता दिया कि दूसरों की ज़िंदगी में रंग कैसे भरे जाते हैं , कैसे कभी ना खत्म होने वाले तमस में असंख्य सूर्य किरणों का उजास फ़ैलाया जा सकता है ।
राम के नाम पर देश को बांटने वाले तो चारों तरफ़ फ़ैले हैं लेकिन नंदलाल ने राम नाम के ज़रिए लोगों को नशामुक्ति की राह दिखाई है । वो आदिवासी इलाकों में राम चरितमानस की चौपाइयों और दोहों को आधार बना कर लोगों को नशाखोरी से निजात पाने का मशविरा देते हैं।
शराब के कारण परिवारों को तबाह होने से बचाने के लिए वो शराब के अड्डे पर जा कर लोगों को समझाते हैं । मयखाने में शराब के नशे में झूमने वालों को वे रामधुन पर झूमने के लिए मजबूर करना वे बखूबी जानते हैं । बात बनती नहीं देख , नंदलाल शराबखाने के बाहर गाहे बगाहे अखंड रामायण पाठ शुरु कर देते हैं ।
नए अंदाज़ में कहे तो उन्होंने अपने अंदाज़ में गांधीगिरी का सहारा लिया है । इस मुहिम की कामयाबी से प्रभावित लोगों ने तो अब उन्हें नाम दे दिया है - शराबियों का डाक्टर । नंदलाल मिसाल है इस बात की कि जंग हौसलों से जीती जाती है हथियारों से नहीं । उसके इसी जज़्बे को सलाम ।
सदाकत [सच्चाई] हो तो दिल सीनों से खिंचने लगते हैं वाइज़
हकीकत खुद को मनवा लेती है , मानी नहीं जाती ।
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