मंगलवार, 30 सितंबर 2014

क्या कानून व्यवस्था भी जाएगी "पीपीपी" मोड में ?



क्राइम के इस पूरे सीन का एक खूबसूरत मोड़ भी है। क्राइम को यह खूबसूरत मोड़ देते हैं गृहमंत्री बाबूलाल गौर। रात को अपराधी अपना काम कर जाते हैं तो सुबह-सुबह अपने लाव-लश्कर को लेकर अंगवस्त्रम डालकर गौर साहब मौके पर पहुँच जाते हैं। घायलों का हौसला बढ़ाने। अस्पताल में भर्ती हैं तो वहां वे पुष्प गुच्छ लेकर मिजाज़पुर्सी के लिए जाते हैं, घायल की पीठ थपथपाते हैं। इस बीच वे बहादुरी के लिए कुछ पुरस्कार भी देकर जाते हैं। और अब तो वे कह रहे हैं कि जिन-जिन घरों में भी वारदात हुई है, वहां की बहादुरी के किस्सों की एक किताब भी छपवाएंगे। सोचिए, ऐसे में किसका दिल नहीं करेगा कि मेरे घर भी अपराध हो। अब तो लगता है कि मध्यप्रदेश सरकार कानून व्यवस्था भी "पीपीपी" मोड में देने की तैयारी में है।
एमपी अजब है, सबसे गजब है। देश-विदेश के सैलानियों को लुभाने के लिए बनाए गए विज्ञापन की पंच लाइन मध्यप्रदेश सरकार के अजब-गजब कारनामों पर एकदम सटीक बैठती है। मुख्यमंत्री दुनिया भर के उद्योगपतियों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करने के लिए जी-जान से जुटे हैं। विदेशों में रोड शो तक कर आए हैं। तरह-तरह की छूटों और आकर्षक पैकेज के साथ निवेशकों के लिए पलक-पाँवड़े बिछाए बैठे हैं। वहीं सूबे के गृहमंत्री बाबूलाल गौर कानून व्यवस्था को सामाजिक मुद्दा बनाकर अपराधियों से निपटने के नए और नायाब नुस्खे तलाश रहे हैं। हाल के महीनों में हुई लूटपाट की घटनाओं में साहस का परिचय देने वालों की "वीरगाथाएँ" पत्रिकाओं में प्रकाशित कर वे सामाजिक चेतना जगाने का नया प्रयोग कर रहे हैं। ये और बात है कि मुख्यमंत्री ने आला पुलिस अफ़सरों की बैठक में प्रदेश में लगातार बढ़ते अपराधों पर हैरानी जताई है। उन्होंने माना है कि हाल ही में जेल में हुई एक हत्या और महिलाओं के साथ हो रहे लगातार अपराध के मामले को लेकर कहा कि ऐसी घटनाओं से लोगों में दहशत फैल रही है। लोगों में विश्वास पैदा करने के लिए पुलिस काम करे।
गता है अपराधियों से निपटने में पुलिस की नाकामियों को छिपाने की खातिर अब वे सामाजिक और सामुदायिक पुलिसिंग की तरफ़ बढ़ रहे हैं। अपनी जान की परवाह किए बगैर बदमाशों से लड़ने वाले लोगों एवं परिवारों के बहादुरी के किस्से अब जल्दी ही मैग्जीन में पढ़ने को मिलेंगे। इस मैग्जीन में 'पीड़ित परिवार के साथ हुई घटना के साथ ही उन्होंने कैसे बदमाशों के छक्के छुड़ाए' तक सभी जानकारी विस्तार से प्रकाशित की जाएगी। 
समूचे प्रदेश में होने वाली घटनाओं को रोकने के बारे में गृहमंत्री बाबूलाल गौर की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लाया जा सकता है कि वे घटना के बाद पीड़ित परिवारों के घर पहुँचकर उन्हें सांत्वना देकर एवं नगद पुरस्कार की राशि की घोषणा कर लौट आते हैं और अपने कर्तव्यों की इतिश्री मान लेते हैं। आपराधिक वारदातों में बेतहाशा बढ़ोतरी से बौखलाए गृहमंत्री पुलिस व्यवस्था को दुरुस्त करने की बजाय कोई आसान रास्ता तलाशते दिखाई देते हैं। तभी तो उन्होंने अब पीड़ितों को बंदूकों के लाइसेंस देने की घोषणा कर डाली। ज़ाहिर है, प्रदेश सरकार आम नागरिकों की सुरक्षा करने में असहाय हो गई है।
यूँ तो मध्यप्रदेश के गृहमंत्री अपने बेतुके बयानों को लेकर भी खासी सुर्खियों में रहते हैं। उनका मानना है कि महिलाओं के प्रति अपराधों में पहनावे का बड़ा योगदान होता है। वे कह चुके हैं कि दक्षिण भारत में महिलाएँ ज़्यादातर साड़ी पहनती हैं, यही यौन उत्पीड़न के मामलों में कमी का मूल कारण है। इसी तरह वे सार्वजनिक रुप से शराब की पैरवी करते भी नज़र आते हैं। गौरतलब है, संघ और भाजपा की संस्कृति में रचे-बसे गौर साहब
के मुख्यमंत्रित्व काल में ही मध्यप्रदेश में शराब की सर्वाधिक दुकानें खोली गईं। भारतीय संस्कृति की दुहाई देने वाली भाजपा के राज में प्याऊ ढ़ूँढ़े से भी नहीं मिलेगी। हाँ, मगर आज सूबे का कोई गली, मोहल्ला या चौराहा ऐसा नहीं बचा, जहाँ देशी-विदेशी शराब नहीं बिकती हो। बलात्कार और महिलाओं से जुड़े अन्य अपराधों के मामले में गौर साहब उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार का पक्ष लेकर एक तरह से पहले ही हाथ खड़े कर चुके हैं कि बलात्कारी बता कर नहीं आता। इस तरह के अपराध रोकना आसान नहीं है।
बहरहाल बेबाक गृहमंत्री बेहद सरल और विनम्र स्वभाव के हैं, तभी तो प्रदेश के विभिन्न शहरों खास तौर पर राजधानी भोपाल में होने वाली लूटपाट की घटनाओं में अपराधियों से लोहा लेने वालों की हौसला अफ़्ज़ाई के लिए वे खुद हाज़िर हो जाते हैं। चोरी, लूटपाट, राहजनी जैसे अपराधों की नियंत्रित करने में नाकाम गृह मंत्रालय इस तरह धीरे-धीरे कानून व्यवस्था कायम रखने का दायित्व भी जनता पर डालने की तैयारी में जुट गया है। अपनी ज़िम्मेदारियों से पल्ला झाड़कर गेंद जनता के पाले में डालने के माहिर खिलाड़ी बाबूलाल गौर ने अब नई तरकीब निकाल ली है। वे चोर-उच्चकों से दो-दो हाथ करने वाली लड़कियों और महिलाओं से उनके घर जाकर मुलाकात कर आते हैं और उन्हें सम्मानित कर देते हैं। अब तो इन वीरांगनाओं के असाधारण साहस और सूझबूझ की कहानियों को पुस्तकाकार देने की भूमिका भी तैयार हो चुकी है। पिछले एक माह के अंदर ही करीब एक दर्जन ऐसी बड़ी-बड़ी घटनाएँ हो चुकी हैं कि नागरिकों ने स्वयं ही अपनी रक्षा की है तथा गुंडे बदमाश लुटेरे पुलिस की पकड़ के बाहर हैं। लगता ही नहीं कि प्रदेश में सरकार नाम की कोई चीज है और ही कानून व्यवस्था होने का कोई अस्तित्व ही दिख रहा है। जब से शिवराज सरकार के सबसे बुज़ुर्गवार और अनुभवी नेता ने गृह मंत्री का कार्यभार सम्हाला है, अब तक घर में घुस कर लूटपाट की एक दर्ज़न से ज़्यादा गंभीर घटनाओं में गौर साहब का यही रुख देखने को मिला है।
अब तो गृहमंत्री की इस अदा पर तरह-तरह के चुटकुले और लतीफ़े आम हो चले हैं। आलम ये है कि गृहमंत्री को अपने यहाँ "न्यौतने" के लिए अब तक अपराधों से नफरत करने वालों में क्राइम और क्रिमिनल को लेकर ज़बरदस्त क्रेज है। लोग इंतज़ार में हैं कि किसी रात उनके घर भी अपराधी धावा बोलें और वे उनसे डटकर मुकाबला करें। थोड़ा पीटें और कुछ पिट भी जाएँ, जख्मी-वख्मी हो जाएँ, तो सोने पे सुहागा। लोग देर रात तक जाग कर, जरा सी भी आहट पर सतर्क होकर मन ही मन चोरों की शामत लाने के मंसूबे बनाते हैं। अपराधी आएँगे तो जोरदार मुकाबला बनेगा। मध्य प्रदेश की पुलिस मुम्बइया पुलिस से भी लेटलतीफ़ है, लिहाज़ा इस बीच पुलिस के आने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता है। अंधेरे में वैसे भी हर चीज गुम हो जाती है। अपराधी भी खो जाते हैं। दिन में पुलिसकर्मी साहब के बंगले पर सब्जी-भाजी या कुत्ते को घुमाने जैसे कुछ ज़रुरी काम या व्हाट्स एप्प पर कोई महान चैट करते रहते हैं। ये तो अपराध हो जाने के बाद क्राइम सीन की स्टडी करती है। गलियारों में छिटके पड़े खून के छींटों का फोटो खिंचवाती है।
अब तो काँग्रेस भी चुटकी लेने से नही चूक रही। प्रदेश काँग्रेस के प्रवक्ता जे.पी. धनोपिया का आरोप है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह छिन्न भिन्न हो गई है। सुदूर अंचल की बात तो छोड़िए राजधानी भोपाल में ही चोरों-लुटेरों के हौसले इतने बढ़ चुके हैं कि वे बेखौफ़ बड़ी-बड़ी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। काँग्रेस 85 वर्षीय गृहमंत्री बाबूलाल गौर की अपने विभाग पर ढ़ीली पकड़ के लिए उनकी उम्रदराज़ी को ज़िम्मेदार ठहराते हुए उन्हें आरामदायक मंत्रालय देने की माँग ज़ोरशोर से उठाने लगी है। वैसे बताते चलें कि पार्टी के बुज़ुर्गवार नेताओं का रिटायरमेंट प्लान तैयार करने के विशेषज्ञ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हाल ही में जब मध्य प्रदेश दौरे पर आए, तो वे भी गौर साहब की "चुस्ती-फ़ुर्ती" देख कर उनकी उम्र पूछने से खुद को रोक नहीं सके। जिसके जवाब में गौर साहब के "सर, अभी तो 84 ही साल का हूँ" ने उन्हें भी लाजवाब कर दिया।
इसी महीने घर में घुसे चोर से दो-दो हाथकर उसे पुलिस के हवाले करने वाली भोपाल के पूर्वाचल फेस वन अवधपुरी निवासी तृप्ति गवेल को सम्मानित करने गृहमंत्री बाबूलाल गौर उसके घर पहुँचे। गृह मंत्री ने घटना के संबंध में तृप्ति और उसके परिवार से विस्तार से चर्चा की। इस दौरान गृहमंत्री ने तृप्ति के असाधारण साहस और सूझबूझ की तारीफ करते हुए कहा कि ऐसी साहसी लड़कियाँ अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा करती हैं, यदि वे पुलिस में भर्ती होंगी तो अपने साथ-साथ समाज की भी सुरक्षा करेंगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि तृप्ति की कहानी राजधानी पुलिस की ओर से छापी जा रही किताब में शामिल की जाएगी।
इससे पहले राजधानी के ही शक्तिनगर में नकाबपोश चोरों का सामना करने में घायल रमेश अय्यर का हालचाल पूछने के लिए गृहमंत्री बाबूलाल गौर अस्पताल जा पहुँचे। गौर ने नर्मदा अस्पताल में उपचार करा रहे रमेश अययर के स्वास्थ्य की जानकारी भी डाक्टरों से हासिल की और चोरों का सामना करने पर उन्हें बधाई भी दी। घायल रमेश शक्तिनगर में अपने छोटे भाई के साथ रहते हैं। तड़के करीब तीन बजे घर में चोर के घुसने की भनक लगते ही पहले सतीश और फिर रमेश हथियारबंद चोर से भिड़ गए। नकाबपोश चोर के पास दो बड़े चाकू थे। सतीश ने डंडे से चोर पर हमला किया तो उसने उनके हाथ में चाकू मार दिया। इसके बाद रमेश निहत्थे ही उस पर टूट पड़े। चोर ने उनके हाथ और पेट पर चाकू से वार किए और बालकनी से कूदकर भाग निकला। इसके बाद घायल हालत में इन्हें उपचार के लिए कस्तूरबा अस्पताल ले जाया गया, जहाँ मरीज की हालत को देखते हुए नर्मदा अस्पताल भेजा गया।
इसी तरह राजधानी में प्रदेश के गृहमंत्री बाबूलाल गौर और एसपी अंशुमान सिंह इसी महीने बच्चों को बचाने लाठी-डंडे लिए आधा दर्जन डकैतों से भिड़ने वाले वैज्ञानिक दंपती से मिलने उनके घर पहुँचे थे। श्री गौर ने वैज्ञानिक दंपति के साहस के लिए उनकी तारीफ करते हुए उन्हें आश्वासन दिया कि डकैतों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। गौरतलब है कि भोपाल में आनंद नगर के इशान पार्क में रहने वाले हाई सिक्युरिटी एनिमल डिसीज लैब (एचएसएडीएल) के वैज्ञानिक दंपती के घर में तड़के चार डकैतों ने धावा बोल दिया था। लेकिन वैज्ञानिक दंपती के साहस के कारण डकैतों को भागना पड़ गया था।
श्री गौर ने यह भी कहा कि भोपाल के साहसी परिवारों पर पुलिस विभाग की ओर से जल्द ही एक मैग्जीन प्रकाशित की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई समाज की सुरक्षा के लिए हथियार के लाइसेंस का आवेदन देना चाहता है, तो वह पुलिस के माध्यम से ऐसा कर सकता है। वे ऐसे लाइसेंस को जल्द ही पास कर देंगे। उन्होंने एसपी अंशुमान सिंह से कहा कि वे ऐसे नागरिकों को चयनित करें, जो कॉलोनियों की सुरक्षा कर सकें। ऐसे नागरिकों को हथियार चलाना और बदमाशों से निपटने की ट्रेनिंग की भी व्यवस्था करें। पुलिस उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर गश्त लगाएगी।
राजधानी में लगातार हो रहे अपराध, इंदौर में जेल के अंदर फायरिंग और रीवा में सरेआम युवती की गोली मारकर हत्या के मामलों में कानून व्यवस्था की किरकिरी होने के बाद गृह एवं जेल मंत्री बाबूलाल गौर ने सूबे के अफसरों को काम में कसावट लाने की हिदायत दी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश की कानून व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा को लेकर गृहमंत्री बाबूलाल गौर के साथ गृह विभाग पुलिस के अफसरों को भी बुलाया। मुख्यमंत्री ने हाल ही में जेल में हुई एक हत्या और महिलाओं के साथ हो रहे लगातार अपराध के मामले को लेकर कहा कि ऐसी घटनाओं से लोगों में दहशत फैल रही है। लोगों में विश्वास पैदा करने के लिए पुलिस काम करे। इसमें जो भी अफसर आड़े रहा है उसे तुरंत हटा दें। अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो मुझे सूची दें, मैं एक्शन लूंगा। मुख्यमंत्री चौहान ने यह भी कहा कि आगामी कुछ दिन बाद नगरीय निकाय के चुनाव आने वाले हैं। इसलिए कानून व्यवस्था की स्थिति को ठीक किया जाए।
आँकड़े बताते हैं कि अपराध, हिंसा और यौन उत्पीड़न के मामलों में मध्य प्रदेश बीते कुछ सालों से उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों को पछाड़ने की होड़ में है। आलम यह है कि बलात्कार और महिला उत्पीड़न से जुड़े अपराधों में सूबा अव्वल पायदान तक पहुँच चुका है। ऐसे में प्रदेश में ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के ज़रिए विकास की राह पर आगे ले जाने की कवायद को कानून-व्यवस्था का मुद्दा पलीता लगाने के लिए काफ़ी है। शासन-प्रशासन बिगड़े हालात पर काबू पाने में नाकाम होता दिखाई दे रहा है, तो क्या अब अपराधों को थामने के लिए भी "पीपीपी" का सहारा लिया जाएगा ? वैसे गौर साहब को कौन बताए कि सुशासन वहीं होता है जहां अपराधी कोई आपराधिक वारदात करने से पहले दस बार सोचे और दंडात्मक कार्यवाही इतनी त्वरित हो कि अपराध करने की सोचे ही नहीं।