सोमवार, 8 जुलाई 2013

सीडी की सियासत....!


मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री रहे राघवजी भाई को चाल, चरित्र और चेहरे की बात करने वाली बीजेपी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अस्सीवीं सालगिरह के मौके पर पचपन साल की सेवा के बदले में पार्टी की तरफ़ से दिया गया यह तोहफ़ा राघवजी भाई के लिए वाकई यादगार रहेगा। यूँ तो प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर, अजय विश्नोई, ध्रुवनारायण सिंह समेत शिवराज मंत्रिमंडल के तमाम सदस्यों पर अनैतिक आचरण के आरोप लगते रहे हैं।लेकिन इससे पहले पार्टी ने कितने मामलों में सख्ती दिखाने की नज़ीर पेश की? फ़िर ऎसा भी नहीं है कि राघवजी पर इस तरह का आरोप पहली मर्तबा लगा हो। दो साल पहले भी अनैतिक यौनाचार के मामले में उन पर अँगुली उठी थी । तब भी सीडी की बात सामने आई थी लेकिन जल्दी ही मामला रफ़ा-दफ़ा हो गया।

दरअसल यह नैतिक आचरण से ज्यादा सियासी मुद्दा है। भाजपा की अँदरुनी राजनीति के साथ ही पक्ष-प्रतिपक्ष के मिलीजुली "प्रदर्शन मुकाबले" के संकेत भी इस घटनाक्रम में साफ़ मिलते हैं। मध्यप्रदेश में पिछले सात सालों से जिस तरह की राजनीति चल रही है, उसमें विपक्ष का अस्तित्व ही खत्म हो चुका है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह वही ज़ुबान बोलते हैं, जो सूबे के मुखिया को रास आए। काँग्रेस के नेता और कार्यकर्ता सत्ता में वापसी के लिए कोशिश करते हैं लेकिन अजय सिंह अपने बयानों या फ़िर अपने तौर तरीकों से इन प्रयासों में तुरंत ही पलीता लगा देते हैं ।

राघवजी के मामले में भी विशुध्द रूप से पटवा-सारंग गुट की सियासी शैली साफ़ झलकती है। इसी सियासी वंश परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अब चेले ने भी ऎन चुनावों के पहले वही दाँव फ़ेंका है। प्रधानमंत्री पद की रेस में अपना नाम खुद ही आगे बढ़ाने की जुगत में लगे सूबे के मुखिया इन दिनों किसी और ही गुणा-भाग में लगे हैं। वे विदिशा से अपनी पत्नी को चुनाव लड़वा कर विधानसभा में पहुँचाने का इरादा रखते हैं। राघवजी के ५५ साल के राजनीतिक सफ़र को एक झटके में नगण्य कर दिया गया। लोकतंत्र की दुहाई देने वाली पार्टी ने आनन फ़ानन में बगैर जाँच किए जिस तरह से राघवजी को बर्खास्त किया, वह भी कई संकेत छोड़ता है।

इस पूरे घटनाक्रम के सूत्रधार के तौर पर शिवशंकर पटेरिया खुद सामने आए हैं । किसी जमाने में उमा भारती के खास रहे पटेरिया लम्बे वक्त से हाशिये पर हैं। वैसे वो मौके और वक्त की नज़ाकत के मुताबिक पाला बदलने में खासे माहिर हैं। इस सीडी कांड के बाद एकाएक सुर्खियों में आए पटेरिया "मुक्त कंठ" से जिस तरह "राग शिवराज" गा रहे हैं। नज़दीक आते चुनावों के मद्देनज़र उनकी उलट-बाँसी विधानसभा क्षेत्रों पर अपनी दावेदारी को लेकर प्रदेश भाजपा में मचे घमासान का मुज़ाहिरा भी करती है।

एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि हाल के दिनों में नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर सीधे और तीखे हमले किए थे। प्रदेश में परिवर्तन यात्राओं के दौरान अजय सिंह ने शिवराज सिह चौहान और उनकी पत्नी साधना सिंह पर कई आरोप लगाए और पत्र लिखकर जवाब भी माँगा। पावस सत्र के दौरान इस बार काँग्रेस एक बार फ़िर अविश्वास प्रस्ताव ला रही है। ऎसे में विपक्ष के आरोपों की धार को कुँद करने के लिए चला गया "अस्त्र" लगता है हमेशा की तरह निशाना पर लगा है। विपक्ष के वार की धा को भोथर करने में इसमें "फ़ूल छाप काँग्रेसियों" की भी भूमिका अहम है।

राघवजी के सीडी काँड के जरिए एक साथ कई निशाने साधे गए हैं। प्रधानमंत्री पद के लिए नरेन्द्र मोदी के नाम पर सहमति जताने वाले संघ को भी इस बहाने अपनी ताकत का एहसास कराने की कोशिश की गई है। यानी इस समय सत्ता का नशा सिर चढ़ कर बोल रहा है। 
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