गुरुवार, 22 सितंबर 2011

मुख्यमंत्री की चीन यात्रा सवालों के घेरे में

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लोकायुक्त के बेटे को लेकर चीन की सैर कर आये हैं । चीन यात्रा में लोकायुक्त पी.पी.नावलेकर के कारोबारी सुपुत्र की सहभागिता विवादों में घिर गई है। चीनी निवेशकों को मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने के लिये आमंत्रित करने की गरज से डालियान,बीजिंग और शंघाई की नौ दिवसीय यात्रा पर गये प्रतिनिधि मंडल में संदीप नावलेकर की मौजूदगी ने एक साथ कई सवाल खड़े किये हैं। उनको मुख्यमंत्री के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में चीन ले जाना कई शंकाओं को जन्म दे रहा है। भाइयों, बीवी और साले की मदद से भ्रष्टाचार की गंगोत्री में पुण्य स्नान करने वाले शिवराज अन्ना और रामदेव के आंदोलन का समर्थन कर खुद को पाक - साफ़ दिखाने की खूब कोशिश करते हैं, लेकिन हकीकत एकदम अलग है । नावलेकर के कारोबारी बेटे के सरकार से जुड़े हित लोकायुक्त की निष्पक्षता को जानने के लिये पर्याप्त है। 

"ठाकुर और गब्बर" की जोड़ी यानी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सपत्नीक चीन पहुँचकर वहाँ के उद्योगपतियों को मध्यप्रदेश आने का न्यौता दिया। ये अलग बात है कि इन्वेस्टर्स मीट के नाम पर अब तक करोड़ों रुपये फ़ूँकने के बावजूद प्रदेश सरकार देशी निवेशकों को ही रिझाने में नाकाम रही है। यानी "जितने की झाँझ नहीं,उससे ज़्यादा के तो मँजीरे फ़ोड़ डालने" की कहावत को चरितार्थ करते हुए शिवराज पूरे लाव-लश्कर के साथ चीन यात्रा पर गये। चीन यात्रा का लुत्फ़ उठाने वालों में आला अफ़सरान के साथ पार्टी और नेताओं के कई चहेते व्यापारी-व्यवसायी भी शामिल थे। 

गौर करने वाली बात यह है कि उनकी टोली में शामिल संदीप नावलेकर महज़ए एक व्यवसायी ही नहीं, बल्कि वे न्यायमूर्ति पी.पी. नावलेकर के पुत्र हैं, जो वर्तमान में प्रदेश के लोकायुक्त के रूप में एक उच्च संवैधानिक न्यायिक जाँच प्राधिकारी भी हैं। वे मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अधिकारियों के खिलाफ मिलने वाली षिकायतों की जाँच कर अपना महत्वपूर्ण फैसला देते हैं। ऎसे में लोकायुक्त के महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की गरिमा को भी राज्य सरकार ने सवालों के घेरे में ला दिया है। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के लगभग दर्ज़न भर मंत्रियों और कई नौकरशाहों की जाँच लोकायुक्त में पेंडिंग है।

काँग्रेस भी इस मामले मैं सरकार पर हमलावर हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने सीधे मुख्यमंत्री को निशाने पर ले लिया है। भूरिया ने शिवराज सिंह से पूछा है कि वे संदीप को चीन की यात्रा पर क्यों ले गए थे जबकि उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के गैर सरकारी सदस्यों के लिए निर्धारित यात्रा शुल्क की रकम भी जमा नहीं की है, जो लाखों रुपये में होती है। उनका आरोप है कि लोकायुक्त के पुत्र संदीप नावलेकर के व्यावसायिक हित म.प्र. सरकार के साथ जुडे़ हुए हैं। प्रदेश काँग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा है कि संदीप नावलेकर डार्लिंग पम्प्स प्रायवेट लिमिटेड, इंदौर के प्रबंध संचालक हैं। यह कंपनी आवास एवं पर्यावरण मंत्री जयंत मलैया और शहरी विकास मंत्री बाबूलाल गौर के विभागों को सीवेज पंप सप्लाई करती है। 

यहाँ ये बताना भी ज़रुरी है कि मध्य प्रदेश देश का ऐसा राज्य है, जहाँ लोकायुक्त को सर्वाधिक अधिकार हैं। संगठन ने इन अधिकारों का बेहतर इस्तेमाल किया हो, ऐसा अब तक नज़र नहीं आया है। लोकायुक्त पी.पी. नावलेकर ने मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी साधना सिंह को दिसम्बर २०१० में बहुचर्चित डंपर खरीदी कांड में क्लीन चिट दे दी थी। लोकायुक्त पुलिस ने अदालत में मामले को खत्म करने की सिफारिश की थीएजिसके आधार पर भोपाल की विशेष अदालत ने उनके हक में फ़ैसला सुनाया था। पूर्व लोकायुक्त रिपुसूदन दयाल भी डंपर मामले की जाँच के दौरान विवादों में फ़ँसे थे। उन पर भोपाल की सांसद-विधायकों की शानदार आवासीय कॉलोनी रिवेयरा टाउनशिप में मकान आवंटन कराने का मामला कोर्ट तक पहुँचा था। इसी तरह उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीयए विधायक रमेश मेंदोला समेत तमाम बड़े नेता और मंत्री लोकायुक्त की सुस्ती का खूब फ़ायदा ले रहे हैं।

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